January 27, 2021

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ईमानदार फारेस्ट अधिकारी के ट्रांसफर के विरोध में जनता ने विधायक के घर पर दिया धरना, जगह जगह धरना प्रदर्शन, विधायक की नोटशीट ही उनके लिए बनी गले की फास??? या अधिकारियों ने जानबूझकर विधायक को उलझा दिया ?? मंत्री नाराज!! मुख्यमंत्री तक पहुंची बात…

केशकाल/ रायपुर, 11 दिसंबर 2020 , केसकाल वनमंडलाधिकारी का ट्रांसफर अब न केवल वनविभाग वल्कि क्षेत्रीय विधायक के लिए भी गले की फास बन गया है। छत्तीसगढ़ वन विभाग में बड़े पैमाने पर आईएफस के तबादले हुए हैं, जिसके चलते कांकेर वन वृत्त के अंतर्गत केशकाल वनमण्डलाधिकारी धम्मशील गणवीर का ट्रांसफर दुर्ग हो गया है, वहीं उनकी जगह रायपुर वनमण्डल के डीएफओ बीएस ठाकुर केशकाल लाया गया हैं।

विधायक का सिफारिशी नोट बना गले की फांस
ट्रांसफर में अधिकारियों ने केशकाल विधायक के जिस सिफारिशी नोटसीट को हथियार बनाया वही अब विधायक के लिए गले की फांस बन गया है। अब जनता विधायक के घर में धरना देकर पूछ रही है कि ईमानदार और काम करने वाले अधिकारी को हटाने विधायक ने नोट शीट क्यों लिखी?? हालाँकि विधायक का कहना है कि धम्मसील का ट्रांसफर करने के लिए नोट सीट लिखने के बाद मंत्रीजी को फ़ोन लगाकर डीएफओ धम्मशील गणवीर का ट्रांसफर नहीं करने को कहा था। विधायक का कहना है उन्हें खुद पता नहीं कैसे सब हुआ?

डीएफओ के ट्रांसफर के खिलाफ जनता का सड़क पर विरोध 1

किन अधिकारियों ने ईमानदार अधिकारी को हटाने रची साजिस??
अब कई सवाल उठने लगे हैं कि आखिर विभाग के दो कौन से अधिकारियों ने मिलकर एक ईमानदार अधिकारी को हटाने साजिस रची ?? जिससे विधायक ही नहीं बल्कि सरकार की भी चारों तरफ बदनामी हो रही है। मुद्दा प्रदेश कि मीडिया के साथ-साथ अब राष्ट्रीय मीडिया में भी उछल रहा है। क्या ट्रांसफर मामले में विभागीय मंत्री को भी अंधेरे में रखा गया?? अंदरूनी खबर यह है कि मंत्री इस मामले में खासे नाराज है। वैसे पूरा प्रदेश जानता है कि मंत्री जी ट्रांसफर पोस्टिंग से खुद को दूर रखते हैं। बात मुख्यमंत्री तक पहुंची है साजिस रचने वाले एक अधिकारी के ऊपर गाज गिर सकती है।

क्या है मामला ?
प्रदेश में वन विभाग ने 35 अधिकारियों का हाल ही में ट्रांसफर किया है जिसमे केसकाल डीएफओ का ट्रांसफर विवादों में घिर गया है। एसजी न्यूज़ से चर्चा करते हुए केशकाल से कांग्रेस विधायक व बस्तर क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष संतराम नेताम ने कहा, मैंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर वन वृत्त कांकेर के सीसीएफ एसएसडी बड़गैंया के कार्यों से नाखुश होकर उन्हें हटाने के लिए पत्र लिखा था, कुछ दिनों बाद निचले स्तर के अधिकारियों और ठेकेदारों की शिकायत पर केशकाल डीएफओ धम्मशील गणवीर को हटाकर उनकी जगह आर के चन्देले को स्थानांतरित करने के लिए लिखा था। लेकिन डीएफओ धम्मशील गणवीर अच्छे अधिकारी हैं बाद में जनभावना और उनके कार्य को देखते हुए मंत्री जी को फ़ोन करके ट्रांसफर नहीं करने को कहा था। डीएफओ धम्मशील गणवीर का ट्रांसफर कैसे हो गया मुझे नहीं पता, मै पता करवाता हूँ।

जिन बीएस ठाकुर का केशकाल ट्रांसफर किया गया वो भी एसएसडी बड़गैय्या के साथ काम करने का अच्छा अनुभव है। विधायक की सिफारिस एसएसडी बड़गैय्या सीसीएफ से हटाने हटाने और आर के चन्देले केशकाल डीएफओ बनाने की मानी नहीं गयी, किन्तु अगर विधायक की बात सच मानी जाए तो विधायक ने जिस डीएफओ को नहीं हटाने मंत्री जी को बोले वो जरूर हटा दिए गए। यहाँ तक कि एक अधिकारी के करीबी को विधायक के क्षेत्र में लाया गया। अब विधायक को अपनी ही जनता को जवाब देते नहीं बन रहा है। साथ ही सरकार की फजीहत अलग हो रही है।

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