April 16, 2021

Suyashgram.com

मासिक पत्रिका एवं वेब न्यूज़ पोर्टल

बड़ी खबर: देश की अर्थव्यवस्था को पटरी में लाने के लिए आरबीआई ने तीन कंपनियों को दिए 50000 करोड़ रुपए…

नई दिल्ली/भोपाल, 17 अप्रैल 2020. कोरोना वायरस के संक्रमण से देश की बिगड़ी हालत को संभालने के लिए  आरबीआई में  दूसरा इकोनामी  बचत डोज  दिया है  जिसमें कई अहम कदम उठाए हैं  देश की तीन कंपनियों को 50000 करोड़ का एक पैकेज जारी किया  जा रहा है.

आज RBI  ने  नाबार्ड, सिडबी और नेशनल हाउसिंग बोर्ड (एनएचबी) को 50 हजार करोड़ रुपये की मदद देने की घोषणा की गई है.

राज्यों की डब्ल्यूएमए सीमा 60 प्रतिशत बढ़ा दी गई है. बढ़ी हुई यह सीमा 30 सितंबर तक के लिए रहेगी.

रिजर्व बैंक ने 50 हजार करोड़ रुपये के टारगेटेड लॉन्ग टर्म रेपो ऑपरेशन (TLTRO) के जरिए 50 हजार करोड़ रुपये सिस्टम में लाने का ऐलान किया है. यह कई टुकड़ों में किया जाएगा और गवर्नर ने कहा कि हालात की समीक्षा के बाद जरूरत हुई तो और भी नकदी डाली जाएगी. गौरतलब है कि आर्थिक संकट के दौर में इन संस्थाओं को नकदी की काफी समस्या हो रही थी.

लिक्विड कवरेज रेशियो 100 से घटकर 80 प्रतिशत हुआ
इसी तरह शेड्यूल कमर्शियल बैंकों के लिए लिक्विड कवरेज रेशियो (LCR) 100 फीसदी से घटाकर 80 फीसदी कर दिया गया है. यह फैसला तत्काल प्रभाव से लागू हुआ. अक्टूबर 2020 तक इसे बढ़ाकर 90 फीसदी किया जाएगा और अप्रैल 2021 तक इसे दोबारा 100 फीसदी कर दिया जाएगा. इस प्रणाली से 6.91 लाख करोड़ का सरप्लस होगा, जो बैंकों को अर्थव्यवस्था में इस सरप्लस का उपयोग करने की अनुमति देगा.

बैंक नहीं देंगे डिविडेंड
शेड्यूल कमर्शियल बैंक और दूसरे फाइनेंशियल संस्थानों को अतिरिक्त 20 फीसदी का प्रोविजन करना होगा. लोन अकाउंट के रेज्योलूशन की चुनौतियों को देखते हुए रेज्योलूशन की अवधि को बढ़ाकर 90 दिन कर दिया गया है. डिफॉल्ट करने वाले बड़े लोन अकाउंट के रेज्योलूशन के लिए 180 दिनों का वक्त दिया जाएगा. 7 जून के सर्कुलर के तहत अतिरिक्त 20 फीसदी प्रोविजनिंग से छूट दी जाएगी. इसके साथ ही बैंक फिस्कल ईयर 2020 से अगले नोटिस तक डिविडेंड नहीं देंगे.

केंद्रीय बैंक की RBI पर पूरी नजर
आरबीआई गवर्नर ने सिस्टम में नकदी संकट कम करने के लिए थ्री लॉन्ग टर्म रेपो ऑपरेशंस (TLTRO) शुरू किया है. 25,000 करोड़ रुपये का TLTRO आज यानी 17 अप्रैल को शुरू किया जाएगा. इससे कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट में तेजी आई है. साथ ही म्यूचुअल फंड पर रीडम्पशन का दबाव भी कम हुआ है. केंद्रीय बैंक लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है कि फाइनेंशियल सिस्टम ठीक से काम कर रहा है या नहीं.

Spread the love