छत्तीसगढ़

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात की राज्य सरकारें लाकडाउन के अंतर्गत राज्य की अर्थव्यवस्था बिगड़ने का हवाला देते हुए श्रम कानूनों को तीन साल के लिए एकतरफा किया बर्खास्त: भारतीय मजदूर संघ ने जताया विरोध, राष्ट्रपति के नाम सौपा ज्ञापन

रायपुर, 20 मई 2020। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात की राज्य सरकारें लाकडाउन के अंतर्गत राज्य की अर्थव्यवस्था बिगड़ने का हवाला देते हुए समस्त श्रम कानूनों को तीन साल के लिए एकतरफा निर्णय लेकर बर्खास्त करने के लिए आदेश जारी किया है। जिसको लेकर मजदूर संघठनों व मजदूरों में विरोध की लहर उठ रही है।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात की राज्य सरकारों ने श्रम कानून किया वर्खास्त
भारतीय मजदूर संघ के जिला मंत्री इंजी नरोत्तम धृतलहरे ने कहा कि कोविड-19 के प्रभाव से अर्थव्यवस्था को पुर्नजीवित करने के लिए, एमएसएमई, किसानों, श्रमिकों आदि के उत्थान के लिए विभिन्न क्षेत्रों को 20 लाख करोड़ रूपये आवंटित करने के केन्द्र सरकार के निर्णय का भारतीय मजदूर संघ स्वागत करता है। परन्तु इसी समय भारतीय मजदूर संघ को यह कहते हुए पीड़ा होती है कि कुछ राज्य सरकारों जैसे उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश एवं गुजरात ने अध्यादेश पारित कर श्रम कानूनों को 3/4 साल के लिए निरस्त करने का निर्णय लिया है। अभी और भी राज्य सरकारें उसी रास्ते पर चलने के लिए सोच रही हैं। कई राज्य सरकारों ने भारतीय मजदूर संघ सहित अन्य श्रमिक प्रतिनिधियों से सलाह किए बिना कारखाना अधिनियम में संशोधन कर काम के घंटे 8 घंटे से बढ़ाकर 12 घंटे कर दिया है।

नरोत्तम धृतलहरे ने कहा कि हमें विभिन्न स्रोतों से पता चला है कि अधिक निवेश आकर्षित किया जायेगा, जिसके परिणामस्वरूप अधिक विकास होगा। परन्तु भारतीय मजदूर संघ राज्य सरकारों के इस विचार को पचा नही पा रहा है जो कि श्रमिक विकास में अवरोधक हैं। भारतीय मजदूर संघ चाहता है कि राज्य सरकारों को देश को यह विश्वास दिलाना चाहिए कि, श्रमिक विकास की राह में कैसे बाधा बन रहे हैं। हम 12 मई 2020 को अपने भाषण के दौरान देश के विकास में श्रमिकों के योगदान को मान्यता देने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आभारी हैं । भारतीय मजदूर संघ का मानना है कि राज्य सरकारों की ये हरकतें भ्रामक, गैरकानूनी, अनुचित, मानवता के खिलाफ, मौलिक अधिकारों का उल्लंघन, आईएलओ कन्वेंशन -47 का उल्लंघन और विकास की दृष्टि के खिलाफ भी है। उक्त विषय के विरोध में आज भारतीय मजदूर संघ जिला रायपुर ने रायपुर के संयुक्त कलेक्टर श्री यू एस. अग्रवाल को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।

मजदूर संघ की क्या है मांग?
भारतीय मजदूर संघ ने मांग की है कि:
1. उत्तर प्रदेश , मध्य प्रदेश एवं गुजरात प्रदेश सरकारों द्वारा तीन साल या उससे अधिक समय के लिए श्रम कानूनो को रद्द करने की तत्काल वापसी।
2. महाराष्ट्र, गोवा, राजस्थान, ओडिशा, बिहार आदि की राज्य सरकारों द्वारा बढ़ाए गए काम के घंटे की तत्काल वापसी।
3. सभी श्रमिकों को मार्च और अप्रैल 2020 की मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करना।
4. प्रवासी श्रमिकों के लिए दोनों तरफ ( जाने वाले स्थान एवं पहुंचने वाले स्थान ) पर भोजन, आश्रय, स्वास्थ्य, परिवहन, काम आदि सुनिश्चित करना।
5. प्रवासी श्रमिकों का राष्ट्रीय रजिस्टर तैयार करना।

भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि अगर सरकार मजदूरों के हितों में फैसला नही लेती है तो बीएमएस केंद्रीय नरेतृत्व के दिशानिर्देश पर उग्र आंदोलन ले लिए बाध्य होगी।

भारतीय मजदूर संघ छत्तीसगढ़ के प्रदेश उपाध्यक्ष श्रीमती लीना मोहन एंटी,जिलामंत्री नरोत्तम धृतलहरे ,छत्तीसगढ़ बिजली कर्मचारी संघ महासंघ प्रदेश महामंत्री हरीश चौहान,राज्य कर्मचारी संघ छत्तीसगढ़ महामंत्री अश्वनी चेलक,रायपुर रेल मंडल के कार्यकारी अध्यक्ष पी एन शाह,वरिष्ठ नागरिक परिसंघ के प्रदेश सयोंजक,वीरेंद्र नामदेव,जिला सहमंत्री नागेंद्र सिंह,जिला कार्यालय मंत्री नेहरू कश्यप ,मोहन एंटी पूर्व अध्यक्ष सन्निर्माण एवं कर्मकार मंडल छत्तीसगढ़ विशेष रूप से उपस्थित रहे।

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