मध्य प्रदेश

मजदूर का दर्द: परिवार को लेकर महिला ने बैल की जगह खुद खींची गाड़ी, बैलगाड़ी के लिए दूसरा बैल नहीं था तो महिला ने कंधे पर उठाया भार…. 

भोपाल, 13 मई 2020. सरकारों के नित नए रोज घोषणा होते हैं लेकिन मजदूर गरीब तक पहुंचते नहीं दिखते है. लॉकडाउन में फंसे लोगों की मजबूरी ऐसी कि घर तक पहुंचने के लिए कोई पैदल जा रहा है तो कोई जुगाड़ से दहलीज तक पहुंचने की कोशिश में है। ऐसा ही एक बड़ा मार्मिक नजारा इंदौर बाइपास पर देखने को मिला। यहां लॉकडाउन में फंसे एक परिवार के पास बैलगाड़ी तो थी, लेकिन एक बैल नहीं था। मजबूरी में कभी महिला को एक बैल का भार उठाना पड़ा तो कभी परिवार के अन्य सदस्यों को।

मजदूर परिवार की महू में रोजी-रोटी छिनी तो इंदौर का एक परिवार बैलगाड़ी से घर जाने के लिए निकला। इसी बैलगाड़ी में गृहस्थी का पूरा सामान भी रख लिया। लेकिन, मुसीबत यह थी कि इनके पास बैलगाड़ी में जोतने के लिए दूसरा बैल नहीं था। परिवार ने तय किया कि सभी लोग थोड़ी-थोड़ी दूर तक बैलगाड़ी को खींचकर घर पहुंचेंगे। इसके बाद एक बैल के स्थान पर कभी महिला ताे कभी पुरुष जुत गए और बैलगाड़ी खींचने लगे।

मजदूर ने बताया कि उसके पास एक ही बैल है, ऐसे में उसने और परिवार के अन्य सदस्यों ने बैलगाड़ी खींची। पैदल घर जाने की बात पूछी तो बोला कि बैल को कहां छोड़ता। इसलिए पूरा परिवार समय-समय पर बैलगाड़ी खींचकर इंदौर से महू के बीच करीब 30 किलोमीटर के सफर पर निकला।

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