January 27, 2021

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वन विभाग में अधिकारीयों के बीच 18.5 प्रतिशत कमीशन बाटने के विवाद में, 800 मजदूर 6 महीने से भटक रहे मजदूरी भुगतान को??? काम के बाद भी पेट की भूख के लिए कराह रहे मजदूर….. रेंजर का आरोप डीएफओ 18.5 प्रतिशत मांग रही मजदूरी भुगतान में कमीशन….

जांजगीर-चंपा, 7 जनवरी 2021। महगी सरकारी गाड़ियों में चलने वाले, बड़े बगलों में रहने और अच्छी तनख्वाह पाने वाले अधिकारी कभी गरीब की भूख क्या होती है इसे कैसे और कब समझेंगे?? दो वक़्त की रोटी के लिए पसीना बहाने वाले 800 मजदूर 6 महीने से अपने की किये काम के भुगतान के लिए अधिकारियों की आपसी खींचतान के कारण भटक रहे है। जवाबदार अधिकारी गोल मटोल जवाब दे रहे है। कारण साफ़ है कि ऊँची तनख्वाह महगी गाड़ी और बड़े बगले में रहने वाले अधिकारी गरीब कि भूख कभी देखा नही है।

रेंजर का आरोप डीएफओ 18.5 प्रतिशत मांग रही मजदूरी भुगतान में कमीशन
शक्ति रेंजर ने सीसीएफ बिलासपुर को 06 जनवरी 2021 पत्र लिखकर कहा है कि चूँकि मेरे द्वारा पूर्व में इस बात की सतर्कता शिकायत मुख्य वन संररक्षक मुख्यालय रायपुर को की गयी थी कि डीएफओ मैडम ने मजदूरी भुगतान में से 18.5 प्रतिशत कमीशन मांग रही है जिसकी जाँच लंबित है, जिसके कारण डीएफओ मैडम का भुगतान में कोई रूचि नही है और अनर्गल पत्र व्यव्हार कर आरोप लगा रही है।

रेंजर ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि उसकी जगह किसी और अधिकारी से मजदूरों को भुगतान कराया जा सकता है।

क्या है पुरानी शिकायत?
वनमंडल चांपा मे पदस्थ सक्ति परिक्षेत्र अधिकारी (रेंजर) एम आर साहू ने दिनांक 05 नवंबर 2020 को, प्रेमलता यादव, वनमंडलाधिकारी चांपा को पत्र लिखकर कहा था कि विगत दो माह से श्रमिकों के पारिश्रमिक भुगतान पर 18.50 प्रतिशत कमीशन की मांग की गयी है. इस सम्बन्ध में बाकायदा प्रेमलता यादव द्वारा दिनांक 03/11/2020 को शक्ति विश्राम गृह में मीटिंग लेकर समस्त वनपाल, वनरक्षक एवं उप वनक्षेत्रपालों से कमीशन की मांग की थी। पत्र मे ये लिखित आरोप है जिसमे बाकायदा किसका कितना कमिशन यह भी उल्लेख है। यह भी लिखा गया है कि 25 बार फ़ोन लगाकर डीएफओ ने रिश्वत की मांग की है लेकिन रेंजर ने देने की असमर्थता जताते हुए ऊपर शिकायत करने कहा गया है. रेंजर के पत्र के अनुसार इसकी शिकायत उसने सतर्कता विभाग को भी की थी जिसकी जांच आज दिनांक तक लंबित है।

किसका कितना है कमिशन?
रेंजर के द्वारा दिनांक 05 नवंबर 2020 को लिखे गए पत्र के मुताबिक मजदूरी भुगतान में डीएफओ ने 18.5 प्रतिशत की मांग की है जिसमे डीएफओ ने ऊपर के अधिकारियों का हिस्सा भी बताया था।

१. डीएफओ स्वयं का कमीशन- 10 प्रतिशत
२. ऊपर के अधिकारियों का कमीशन- 7.5 प्रतिशत
३. अन्य व्यय पर पर कमीशन- 1 प्रतिशत

क्या अधिकारियों के कमीशन का खेल रोक रहा मजदूरी का भुगतान ?
किसकी क्या गलती है यह तो अधिकारी जाने लेकिन एक बात तय है कि अधिकारियों के आपसी विवाद का खामियाजा गरीब मजदूर भुगत रहा है। 6 माह से भुगतान नही होना जबकि काम का जिओ टैग करा लिया गया है इस तरफ जरूर इसारा करता है कि दाल में काला है।

नीचे से लेकर ऊपर तक के सभी अधिकारियों को पता है काम हुआ है तो भुगतान क्यों नही ? अगर किसी अधिकारी कि गलती है या गलत भुगतान के लिए लिए भेजा है तो उसकी जांच क्यों नही ? क्या यह मान लिया जाय कि कमीशन के खेल ने ही मजदूरों के पसीने कि कमाई देने के लिए रोक रखा है ?? जाँच और भुगतान कि समय सीमा अधिकारी क्यों तय नही करते ? 6 माह से मजदूरों का भुगतान न होना कही न कही शिकायत कि बातों को सही प्रतीत करती है। अन्यथा भुगतान क्यों रुकता जाँच कर अब तक भुगतान किया जा सकता था।

जल्द मजदूरों का जत्था पहुंचेगा रायपुर मुख्यमंत्री निवास
एसजी न्यूज़ के संवादाता से बातचीत में कुछ मजदूरों ने कहा अगर जल्द भुगतान नही हुआ तो वे सभी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निवास जाकर ही धरना देंगे। अपनी पीड़ा प्रदेश मुखिया को सुनाएंगे, अगर भूखे रहना है तो मुख्यमंत्री के घर के सामने ही भूखे बैठेंगे।

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