May 10, 2021

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DFO सायकल से 20 किमी सुबह ही पहुचे आरामिल छापा मारने… अधीनस्थ पहुचे 2 घंटे बाद… बड़ी पहुंच रखने वाले के आरामिल को अवैध लकड़ी के चलते किया सील..

रायपुर/दुर्ग, 05 मार्च 2021. अवैध लकड़ी तस्करी का गढ़ बनते जा रहे दुर्ग जिले में DFO की ताबड़तोड़ कार्रवाई से लकड़ी तस्कर ही नहीं वन विभाग में भी उस समय हड़कंप मच गया जब दुर्ग वनमण्डलाधिकारी 20 किमी सायकल चलाकर बिना स्टाफ को सूचना दिए एक आरामिल में छापा मारने पहुंच गये.

नीचे के अधिकारी आरामिल मालिक को नहीं दे पाए खबर
असल में पुराने DFO की तरह योजना मुताबिक कार्रवाई करने के आदी अधिकारी इस बार अपनी सेटिंग नहीं कर पाए और उन्हें उस आरामिल में कार्रवाई करनी पड़ी जहां की दहलीज वह डाकने से भी डरते थे। जानकारी के मुताबिक दुर्ग वन मंडलाधिकारी धम्मशील गणवीर गुरुवार सुबह रोज की तरह अपनी स्कार्पियो से निकले और फिर नेवाई के आगे गाराडीह पहुंच कर ड्राइवर को गाड़ी से उनकी साइकिल उतरवाई। इसके बाद वह वहां से अकेले ही साईकिल लेकर निकल गए। एक आम शहरी व्यक्ति की वह साइकलिंग करते हुए 20 किलोमीटर का सफर तय करके रानीतराई क्षेत्र में पहुंच गए। करीब आंधे घंटे तक क्षेत्र का दौरा करने के बाद उनकी साइकिल रानीतराई बाजार चौक बस स्टैंड के सामने स्थित धनराज साहू सा मिल पर जा रूकी। 10 मिनट मिल का निरीक्षण किया और फिर अपनी टीम को बुलवाया। टीम के लोग दूसरी आरामिल को DFO के छापे की खबर दे पाते DFO गणवीर वहां पहुंच गए। जैसे ही वन विभाग के दूसरे अधिकारियों यह पता चला कि DFO बाजार चौक तालाब के पास स्थित राधेरमन चंद्राकर सा मील में छापा मारने पहुंच गए हैं तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। क्योंकि राधेरमन चंद्राकर सा मील एक ऐसी मील है जिस पर राजधानी में बैठे एक बड़े अधिकारी का हाथ है। इतना ही नहीं मिल संचालक प्रदेश के बड़े नेताओं व मंत्रियों तक अपनी पहुंच रखता है। यही कारण है खुलेआम धड़ल्ले से प्रतिबंधित अर्जुन की लकड़ी की चिराई करने करने के बाद भी आज तक यहां कोई भी वन अधिकारी कार्यवाही करने नहीं पहुंचा है।

नीचे के अधिकारीयों के कापे हाँथ
गुरुवार सुबह डीएफओ ने जैसे ही फोनकर एसडीओ, रेंजर और डिप्टी रेंजर को दोनों आरामील का नाम बताया और उन्हें सील कर प्रतिबंधित लकड़ी को जब्त कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए तो अधिकारियों के पैरों तले जमीन खिसक गई।

शिकायत थी लेकिन नेक्सस तोड़ने के लिये करना पड़ा अलग तरह से कार्यवाही: DFO गणवीर धम्मशील

एसजी न्यूज़ ने दुर्ग डीएफओ गणवीर धम्मसील से उक्त छापे के बारे में पूछा कि इस तरह बिना अपने नीचे के स्टाफ को बताये छापा मारने की क्यों जरुरत पड़ी? क्या पहले से शिकायत थी या अचानक हुआ? उन्होंने कहा शिकायत थी अवैध कार्यों की लेकिन नेक्सस होने की वजह से बिना बताये अलग तरीके से छापामार कार्यवाही करनी पड़ी.

बड़ा सवाल, DFO बचेंगे या आरामिल का लायसेंस हों रद्द?

पिछले 24 घंटे में इस छापामार कार्यवाही की चर्चा दुर्ग से लेकर मंत्रालय और आरण्य भवन (वन मुख्यालय) तक हैं. कहा यह भी जा रहा हैं कि वन मुख्यालय में पदस्थ एक बड़े अधिकारी का हाथ आरामिल मालिक के ऊपर हैं. अब सवाल तो उठेगा ही कि DFO की कार्यवाही के तहत आरामिल का लइसेंस निरस्त होगा या आरामिल को बचाने DFO को हटाना हैं. एक बात तय हैं धम्मसील के रहते अवैध लकड़ी तो आरामिल वाले उपयोग नहीं कर सकते.

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